छात्रों का विधानसभा घेराव, पुलिस कार्रवाई से गरमाया माहौल
REWA TODAY DESK : झारखंड की राजधानी रांची में अगस्त 2026 में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर छात्र और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में विधानसभा का घेराव करने पहुंचे। इस दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की सभी छात्रों ने तना सही मचा दी थी ।

विधानसभा घेराव करने पहुंचे हजारों अभ्यर्थी
प्रदर्शन में शामिल छात्रों की प्रमुख मांग परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने से जुड़ी बताई गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी से मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है और वो बेरोज़गार रह जा रहे है ।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर कूच किया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया।

बैरिकेडिंग तोड़ने पर बढ़ा तनाव
प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के सुरक्षा घेरा पार करने और बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया और छात्र आक्रोशित हो गए । स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का जैसे कई उपकरणों का इस्तेमाल किया।
पुलिस कार्रवाई के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। पूरे घटनाक्रम ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया और अभ्यर्थियों की शिकायतों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
सीएम के जन्मदिन के दिन भी रहा सियासी माहौल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जन्मदिन भी चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री के जन्मदिन के मौके पर जहां समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से शुभकामनाएं दी गईं, वहीं दूसरी ओर राजधानी में छात्रों का आंदोलन सरकार के सामने युवाओं से जुड़े रोजगार और भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे को प्रमुखता से लेकर आया।
ऐसे में एक ही दिन रांची में राजनीतिक गतिविधियों और छात्रों के रोजगार संबंधी आंदोलन ने राज्य के माहौल को खास बना दिया।
छात्रों की प्रमुख चिंताएं क्या हैं?
JPSC और JSSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं राज्य के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में कथित पेपर लीक या परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी स्वाभाविक है।
छात्रों की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं—
परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता।
कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई।
निष्पक्ष परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया।
अभ्यर्थियों के भविष्य और मेहनत की सुरक्षा।
2021 का विधानसभा विवाद इससे अलग था
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अगस्त 2026 का छात्र आंदोलन और सितंबर 2021 का झारखंड विधानसभा विवाद दो अलग-अलग घटनाएं हैं।
सितंबर 2021 में झारखंड विधानसभा की नई इमारत में मुस्लिम विधायकों के लिए नमाज पढ़ने हेतु एक कमरा आवंटित किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ था। उस समय भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करने और विधानसभा परिसर में हनुमान मंदिर बनाने की मांग भी सामने आई थी।
इसलिए 2021 का मामला मुख्य रूप से विधानसभा में धार्मिक प्रार्थना के लिए कमरे के आवंटन से जुड़े राजनीतिक विवाद का था, जबकि अगस्त 2026 का मामला JPSC-JSSC परीक्षाओं और कथित भर्ती अनियमितताओं को लेकर छात्रों के आंदोलन से संबंधित है।
युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया क्यों जरूरी?
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हजारों युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षा में किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत सामने आने पर उम्मीदवारों का भरोसा प्रभावित होता है।
ऐसे मामलों में परीक्षा एजेंसियों और सरकार के लिए जरूरी है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोष पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर ऐसी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है, जिससे पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन एक बार फिर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता के मुद्दे को सामने लाता है। अभ्यर्थियों की मांगों पर निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है, ताकि युवाओं का भर्ती व्यवस्था पर भरोसा कायम रहे।



















































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