रीवा के बिछिया थाना अंतर्गत बीते दिनों सिलपरा नहर घूमने बहन और भाई के साथ आये सैनिक का पैर फिसल गया था, और वह नहर के गहरे पानी में समा गया था। इस बात की जानकारी स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दी गई,पुलिस ने रीवा की एसडीआरएफ को सूचना दी, एसडीआरएफ ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया लेकिन सैनिक को नहीं खोज पाई।
उसके बाद बनारस से एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया, लेकिन वह भी सैनिक को खोजने में असफल रही, तब जाकर आगरा से पैरामिलिट्री फोर्स को बुलाया गया जिसने सिलपरा नहर में 120 फीट गहराई में डूबे सैनिक का शव 6 दिन बाद निकाला, बनारस से आई एन डी आर की टीम के पास बेहद गहराई में तलाश करने वाले इक्विपमेंट नहीं थे ,कैमरा नहीं था।
उसके बादआगरा से आये पैरा ब्रिगेड कमांडो के दल को बुलाया गया, जिसने 120 फीट नीचे गहराई मे टरबाइन के पास फंसे हुए सैनिक का शव खोजने में कामयाबी पाई। लेकिन पानी का प्रेशर इतना ज्यादा था वहां तक पहुंच पाना बेहद चुनौती वाला काम था, प्रशासन की मदद से पानी के लेबल को काम किया गया, तब जाकर पैरामिलिट्री फोर्स ने शव को निकालने का एक बड़ा अभियान चलाया,पैरामिलिट्री फोर्स ने जिस जगह से शव बरामद किया, वहां पर काफी बड़ी सी टरबाइन लगी हुई है, वहीं पर जाली के पहले सैनिक का शव फंसा हुआ था, यहां पर पानी काफी ऊंचाई से गिरता है, जिसके चलते पानी का फोर्स वहां पर बेहद ज्यादा होता है।
कैसे हुआ था हादसा
इस दुखद घटना ने पूरे जिले को शोक में डुबो दिया था। एक सैनिक का अपने परिवार के सामने डूबना, परिवार को जिंदगी भर का गम दे गया। 3 जून का दिन सैनिक का परिवार कभी नहीं भूल पाएगा दरअसल सैनिक छुट्टियों में श्रीनगर से अपने घर आए हुए थे, 3 जून को परिवार ने सिलपरा नहर घूमने का प्लान बनाया।
भाई और बहन साथ में थे, सभी नहर के किनारे टहल रहे थे इसी दौरान, अचानक सैनिक का पैर फिसला और देखते ही देखते वह तेज बहाव में बह गए। सिलपरा नहर के गहरे पानी में समा गए, बीते बुधवार को हुई इस घटना के बाद बिछिया थाना पुलिस को सूचना दी गई उसने एसडीईआरएफ को मौके पर भेजा, बचाव दलों ने लगातार कई दिनों तक तलाशी अभियान चलाया। लेकिन सैनिक का शव खोजने में कामयाबी नहीं मिली, उनके घर वाले बेहद परेशान थे, प्रशासन ने बनारस से एनडीआरएफ को बुलाने का फैसला किया,बनारस से आई एनडीआरएफ की टीम भी सैनिक को नहीं खोज पाई, तब जाकर आगरा से पैरा मिलिट्री फोर्स को बुलाया गया, दरअसल सिलपरा नहर की गहराई बेहद ज्यादा है।
ऐसे में सैनिक को खोज पाना बेहद चुनौती पूर्ण काम था, आगरा से 411 पैरा ब्रिगेड की विशेष कमांडो टीम रीवा पहुंची। टीम अत्याधुनिक संसाधनों से लैस, पानी में बेहद गहराई तक देख पाने वाले कैमरे और उपकरण मौजूद थे, जिसके चलते टीम ने जल्दी ही पता लगा लिया सैनिक कम कहां पर है, 120 फीट गहराई में जवान का शव टरबाइन के पास फंसा हुआ था। टरबाइन चालू थी, बिजली बन रही थी, टरबाइन के पास पानी का दबाव बेहद ज्यादा था, पानी के दबाव के कारण शव तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा था। नहर का पानी काम कराया गया इसके बाद दोबारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया और कुछ घंटे की मेहनत के बाद सैनिक का शव पानी के अंदर से 6 दिन बाद पैरा मिलिट्री फोर्स ने बरामद कर लिया ।
सिलपरा नहर बेहद चुनौती पूर्ण है, बेहद असुरक्षित भी है बचाव के दौरान एक महिला भी गिरी थी ,जिसे बचा लिया गया था
यह नहर बेहद चुनौती पूर्ण है, काफी गहरी है, साल के 12 महीने पानी का बहाव बेहद ज्यादा होता है, इस नहर में आए दिन हादसे होते रहते हैं, सैनिक के गिरने के बाद रीवा की एसडीआरएफ की टीम सैनिक को तलाश रही थी इस दौरान एक महिला भी नहर में गिर गई थी महिला की किस्मत बेहद अच्छी थी एसडीआरएफ की टीम पानी के अंदर मौजूद थी, तत्काल ही एसडीआरएफ के जवान महिला तक पहुंचे थे ,और महिला को सुरक्षित निकाल लिया था ,लेकिन ऐसी किस्मत सबकी नहीं होती है।
यहां पर सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम की जरूरत है। लेकिन इस और किसी का ध्यान नहीं है। सिलपरा नहर हादसों की नहर बन गई है, ऐसा भी कहा जा सकता है। इस नहर में गिरने के बाद बहुत कम लोग ही वापस सुरक्षित निकाल पाए हैं।



















































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