श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय, रीवा के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने आधुनिक थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है।

विगत दिनों विभागाध्यक्ष गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग प्रोफेसर डॉ. एम. एच. उस्मानी एवं सह-प्राध्यापक डॉ. पी. निगम की टीम ने संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय के इतिहास में पहली बार एक 5 वर्षीय बालक की बड़ी आंत में गठान (पॉलीप) का सफल एंडोस्कोपिक उपचार किया। गंभीर रक्तस्राव के कारण बालक में अत्यधिक रक्ताल्पता (एनीमिया) विकसित हो गई थी।
विभाग में स्थापित नवीन इलेक्ट्रोसर्जिकल यूनिट एवं एंडोस्कोपी उपकरणों की सहायता से सफल एंडोस्कोपिक स्नेयर पॉलीपेक्टॉमी की गई। पॉलीपेक्टॉमी के पश्चात डिलेड ब्लीडिंग की संभावना को कम करने हेतु हीमोक्लिप्स भी लगाए गए, जिससे सुरक्षित हीमोस्टेसिस सुनिश्चित किया जा सका तथा शल्य चिकित्सा की आवश्यकता नहीं पड़ी। वही एक दूसरे मामले में 31 साल कीमत महिला, जो पित्ताशय एवं पित्तनली की पथरी से पीड़ित थीं तथा पूर्व में अन्यत्र पित्ताशय का ऑपरेशन करा चुकी थीं, मरीज में पित्तनली में फँसी रह गई पथरियाँ तथा लंबे समय से विद्यमान बिलियरी स्टेंट की जटिल समस्या का सफल एंडोस्कोपिक उपचार किया गया।
थेराप्यूटिक ई.आर.सी.पी. द्वारा उक्त स्टेंट को निकाला गया तथा पित्तनली को पूर्णरूपेण पथरियों एवं स्टेंट से मुक्त किया गया।गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की स्थापना के दो माह से भी कम समय में 160 से अधिक एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं संपन्न की जा चुकी हैं, तथा प्राणघातक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रक्तस्राव के कई मामलों में सफल एंडोस्कोपिक उपचार प्रदान किया जा चुका है।
क्या कहते हैं डॉक्टर मंजर उस्मानी
प्रोफेसर डॉ. उस्मानी ने बताया कि आपातकालीन एंडोस्कोपिक इंटरवेंशंस के अतिरिक्त विभाग ने एंडोहेपेटोलॉजी, इन्फ्लेमेटरी बावल डिजीज (आई.बी.डी.), क्रॉनिक डायरिया, डिस्फेजिया, कॉरोसिव गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंजरी तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर्स के निदान एवं उपचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मंजर उस्मानी ने इनको दिया सफलता का श्रेय
इन उपलब्धियों का श्रेय गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के फैकल्टी सदस्यों, नर्सिंग अधिकारियों, विभागाध्यक्ष निश्चेतना प्रोफेसर डॉ. अवतार सिंह यादव के कुशल निर्देशन में कार्यरत एनेस्थीसिया टीम तथा अन्य सहयोगी कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों को जाता है। एंडोस्कोपी यूनिट में कार्यरत नर्सिंग अधिकारी विशेष रूप से सराहना की पात्र हैं, जिनकी सीखने की तत्परता, समर्पण एवं परिश्रम ने विभाग में एडवांस्ड एंडोस्कोपिक सर्विसेज़ की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
गौरतलब है कि विभाग में एंडोस्कोपी टेक्नीशियन उपलब्ध न होने के बावजूद एंडोस्कोपी यूनिट में पदस्थ नर्सिंग अधिकारियों को इलेक्ट्रोसर्जिकल यूनिट एवं एडवांस्ड एंडोस्कोपिक इक्विपमेंट के संचालन एवं रखरखाव संबंधी प्रशिक्षण विभागीय फैकल्टी द्वारा हैंड्स-ऑन डेमॉन्स्ट्रेशन्स एवं सुपरवाइज्ड ट्यूटोरियल्स के माध्यम से प्रदान किया जा रहा है।
प्रदेश के डिप्टी सीएम को भी दी बधाई
विभाग द्वारा राजेन्द्र शुक्ल जी, उपमुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश शासन एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया, जिनके नेतृत्व एवं सतत सहयोग से रीवा में उन्नत गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सेवाओं की स्थापना एवं विस्तार संभव हो सका है।
विभाग ने प्रो. डॉ. सुनील अग्रवाल, डीन, श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय, प्रो. डॉ. राहुल मिश्रा, संयुक्त संचालक सह अधीक्षक, संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय, रीवा के सहयोग भी उल्लेखनी रहा। आज की तारीख में संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय, रीवा का गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग समूचे विंध्य क्षेत्र एवं आसपास के दूरस्थ अंचलों के मरीजों को आधुनिक, एविडेन्स-बेस्ड तथा मिनिमली इनवेसिव गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।


















































Leave a comment