REWA TODAY DESK उत्तर पूर्व भारत के पहले शहीद होने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाल पद्मधर सिंह को आज याद किया गया रीवा में।आज ही के दिन पद्मधर सिंह 12 अगस्त 1942 को गांधी जी के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन से प्रभावित होकर अपने कॉलेज के साथियों के साथ प्रयागराज कचहरी तक हाथों में तिरंगा लेकर रैली निकाल रहे थे।
रास्ते में अंग्रेजों ने उनको रोका, तिरंगा जमीन में रखने के लिए कहा, साथ में लड़कियां थी, अंग्रेजों ने कहा तिरंगा जमीन में रखो नहीं तो सबको गोली मार दी जाएगी, लड़कियां जमीन में लेट गई, लाल पद्मधर सिंह आगे बढ़े, उन्होंने कहा तिरंगा जमीन में नहीं रखूंगा, चाहे तो गोली मार दो, और अंग्रेजों की गोली से शहीद हो गए। मरते दम तक उनके हाथों से तिरंगा नहीं छूटा।

ऐसे वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की याद में आज रीवा के ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय में जहां उनकी प्रतिमा स्थापित है, उनके परिजनों सहित शहर के तमाम लोगों ने पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी उनको याद किया।

लाल पदमधर सिंह का जन्म 14अक्टूबर 1914 को सतना के कृपालपुर में हुआ था। पढ़ाई उनकी रीवा में हुई। उनके भतीजे विक्रम सिंह बताते हैं, रीवा में पढ़ाई के दौरान उनका एक किस्सा और मशहूर है। स्कूल के अंग्रेज प्राचार्य ने एक बार उन पर फिजिक्स की पढ़ाई के दौरान सात रंग को देखने वाले प्रिज्म चोरी का इल्जाम लगा दिया, लाल पदमधर सिंह ने चोरी से इनकार किया।
प्राचार्य नहीं माने उन्होंने कमरे की तलाशी लाल पद्मधर सिंह ने कहा तलाशी में अगर मेरे पास प्रिज्म नहीं निकला तो मैं आपको गोली मार दूंगा और उन्होंने गोली चला दी जिसके चलते उनको 7 साल की सजा हुई लेकिन तत्कालीन महाराज रीवा गुलाब सिंह ने उनको 3 साल की सजा काटने के बाद माफी दे दी ।
लाल पदमधर सिंह आगे की पढ़ाई के लिए उस समय के इलाहाबाद अब प्रयागराज चले गए। बचपन से ही अंग्रेजों के खिलाफ मन में गुस्सा भरा हुआ था। गांधी जी से बेहद प्रभावित थे, इसी दौरान गांधी जी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो की मुहिम छेड़ी, लाल पद्मधर सिंह ने हाथ में तिरंगा थामा ,और अपने कॉलेज से प्रयागराज कचहरी की ओर निकल पड़े ,अपने साथियों के साथ रास्ते में अंग्रेज अफसर डिक्शन ने उनको रोका तिरंगा जमीन में रखने और वापस जाने के लिए कहा।
लेकिन लाल पद्मधर सिंह ने साफ तौर से इनकार कर दिया। और तिरंगा लेकर आगे बढ़े, नतीजे में अंग्रेजों ने गोली चलाई, और लाल पदमधर सिंह शहीद हो गए। महापौर रीवा अजय मिश्रा बाबा कहते हैं, लाल पद्मधर सिंह की याद को जीवित रखने के लिए उनकी एम आई सी की टीम ने एक स्टैचू बनवाई है। जो उनके नाम से ही रीवा के ऐतिहासिक पद्मधर पार्क में लगा दी है जल्दी ही इसका लोकार्पण किया जाएगा।
इतिहासकार असद खान बताते हैं, इलाहाबाद में अंग्रेज अफसर डिक्शन ने उस समय के इलाहाबाद एसपी आगा खान को जुलूस रोकने के निर्देश दिए, और कहा जुलूस नहीं रुका तो गोली चला दो, पदमधर सिंह नहीं माने गोली चली और पद्मधर सिंह शहीद हो गए।



















































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