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रिपोर्ट | विशेष लेख दुनिया भर के मुसलमानों के लिए पवित्र महीना रमज़ान इबादत, आत्मसंयम और इंसानियत का संदेश लेकर आता है। इस महीने में रोज़ा रखना केवल भूखे-प्यासे रहना नहीं, बल्कि अपने दिल और दिमाग को पाक करने का एक आध्यात्मिक अभ्यास है। इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना रमज़ान, अल्लाह की रहमत और बरकत से भरा हुआ माना जाता है।
📖 रमज़ान क्यों है खास?
इस पवित्र महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। यह परंपरा पैगंबर हज़रत Muhammad के बताए मार्ग पर चलने की याद दिलाती है। इसी महीने में इस्लाम की पवित्र किताब Quran का अवतरण हुआ था, जिसे पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शन माना जाता है।
रोज़ा इंसान को सब्र, शुकर और तक़वा (परहेज़गारी) सिखाता है। दिन भर भूख और प्यास सहने से व्यक्ति को गरीबों और जरूरतमंदों की तकलीफ का एहसास होता है, जिससे समाज में दया और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
🤲 इबादत और आत्मशुद्धि का समय
रमज़ान में नमाज़, कुरान की तिलावत और दान (ज़कात व सदक़ा) का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस महीने में नेकियों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। रातों में तरावीह की नमाज़ अदा की जाती है, जिससे मस्जिदों में रौनक बढ़ जाती है।
🌟 शब-ए-कद्र की बरकत
रमज़ान के आखिरी दस दिनों में आने वाली पवित्र रात शब-ए-कद्र को हजार महीनों से बेहतर बताया गया है। इस रात इबादत करने का विशेष महत्व है। मुस्लिम समाज इस रात को जागकर दुआ और इबादत में गुजारता है।
🤝 सामाजिक एकता और इंसानियत का संदेश
रमज़ान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। इफ्तार के दौरान लोग एक साथ बैठकर रोज़ा खोलते हैं, जिससे आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ता है। अमीर-गरीब का भेद मिटाकर सब एक ही सफ में खड़े होकर नमाज़ अदा करते हैं।
🌍 आज के दौर में रमज़ान का संदेश
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रमज़ान हमें संयम, सादगी और आत्ममंथन का अवसर देता है। यह महीना सिखाता है कि सच्ची सफलता केवल भौतिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अच्छे चरित्र और नेक कार्यों में है।
रमज़ान का महीना आत्मशुद्धि, सेवा और इंसानियत का संदेश देता है। यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और इंसान को बेहतर बनाने का जरिया है।रमज़ान मुबारक! 🌙



















































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