सौ से ज्यादा वैरायटी के आम एक ही छत के नीचे,
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सौ से ज्यादा वैरायटी के आम एक ही छत के नीचे,

More than a hundred varieties of mangoes under one roof.

डायबीटिक पेशेंट और हृदय रोगी क्या आम खा सकते हैं जानिये


रीवा के कुठुलिया स्थित अनुसंधान केंद्र में मैंगो फेस्टिवल का आयोजन किया गया। इस दौरान इस बगीचे में लगी 237 प्रजातियों में से 100 से ज्यादा प्रजातियां के आम का प्रदर्शन भी किया गया। आम की इस प्रदर्शनी में लोगों के आकर्षण का केंद्र सुंदरजा आम के अलावा बगीचे में इरविन आम भी रहा । इरविन अमेरिका का आम है ,इसमें ठीक सारे वही गुण हैं जो जापान के मियांखंजा आम में नजर आते हैं, जो बाजार में 40 से 50 हजार रूपये किलो बिकता है। वहीं एरविन 100 से डेढ़ सौ रुपए किलो के बीच बिकता है।


आम को लेकर क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ


प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एस के त्रिपाठी ने कहा मैंने आम की इतनी वैरायटी एक साथ इसके पहले कहीं नहीं देखी थी। डायबिटीज पेशेंट,हृदय रोगी सहित कोई भी मरीज आम को खा सकता है। सुंदरजा की यही खासियत है, जिसके चलते उसे जी आई टैग भी मिला है,और नाम दिया गया है 707।


मैंगो फेस्टिवल का हुआ उद्घाटन


रीवा का कठुलिया स्थित अनुसंधान केंद्र जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से संबंध है ।रीवा का एग्रीकल्चर कॉलेज उसके अंडर में कुठुलिया का रिसर्च सेंटर है,जहां पर नई-नई वैरायटी का रिसर्च होता है। देश विदेश के अलग-अलग हिस्सों से यहां पर पौधों को लाया जाता है, उन पर रिसर्च होता है,मौसम के अनुकूल रीवा और उसके आसपास किस तरीके के फल लगाए जा सकते हैं। जिनका बेहतर रिजल्ट हो, बेहतर उत्पादन हो ,फिलहाल यहां पर पूरे देश दुनिया से 237 प्रकार के आम के पौधे लाये गए हैं। और उनको लगाया गया है। ज्यादातर पौधे फल भी दे रहे हैं।

उन्हीं फलो पर यह सेंटर रिसर्च कर रहा है। रीवा का सुंदरजा आम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, इस आम को आइसक्रीम के तरह स्कुप से निकाल कर आप खा सकते हैं, इस आम में शुगर की मात्रा बेहद कम होती है।सुंदरजा आम के ऊपर डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है। सुंदरजा कल लंबे समय तक रखा जा सकता है। इस तरीके की तमाम खूबियों के चलते इसे जी आई टैग भी मिला है। नंबर दिया गया है 707 ।

वही इरविन आम की बात की जाए तो यह अमेरिकन आम है, ठीक रंग रूप आकार स्वाद में जापान के 40 से 50 हजार रूपये किलो बिकने वाले मियां खंजा आम की तरह है, अनुसंधान केंद्र के हेड डॉक्टर की के सिंह कहते हैं,जापानी आम महंगा है, उसमें कोई भी खासियत नहीं है। लगाना है तो आप इरविन लगाइए।

सुंदरजा इरविन के अलावा यहां पर मलिका, ,लंगड़ा,लॉकडाउन, करेला, मालदहा, तोतापरी, दशहरी, केसर, आम्रपाली,जैसी 237 प्रकार की आमों की वैरायटी लगाई गई है। जो फल दे रही हैं, यहीं से तोड़कर 100 से ज्यादा वैरायटी के आम यहां पर रखे गए हैं,जो लोगों के आकर्षण के केंद्र है। इन्हीं फलों पर रिसर्च करता है यह केंद्र, और समय-समय पर अपने फलों के उत्पादो को प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों तक पहुंचाता है।

तमाम तरीके की रिसर्च के बाद एक नई वैरायटी यहां पर जन्म लेती है, जो इस इलाके के मौसम के अनुरूप होती है। उसके प्रोडक्शन सहित उसके अंदर तमाम तरीके के गुणो का समावेश करके किसानों को लगाने के लिए दिया जाता है उस वैरायटी का पौधा। आज जिस तरीके से कुठुलिया फॉर्म में आम के पौधों की प्रदर्शनी के अलावा उनके फल को भी लगाया गया था। भारी तादाद में किसानों ने पहुंचकर ,साथ ही एग्रीकल्चर कॉलेज के छात्रों ने पहुंचकर आम की अलग-अलग वैरायटी उनके गुणो को देखा। इतनी भारी तादाद में आम की वैरायटी और सभी वैरायटी एक से बढ़कर एक देखकर मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए ।

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