Wednesday , 1 April 2026
    International Volunteer Day celebrated as social service, life element of Indian culture - Dr. Akhilesh Shukla
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    अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस मनाया गया समाज सेवा, भारतीय संस्कृति का प्राण तत्व – डॉ अखिलेश शुक्ल

    International Volunteer Day celebrated as social service, life element of Indian culture - Dr. Akhilesh Shukla


    Rewa Today Desk :शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय के समाज कार्य विभाग द्वारा प्राचार्य डॉ. श्रीमती अर्पिता अवस्थी के निर्देशन एवं विभागाध्यक्ष डॉ अखिलेश शुक्ल के संयोजन में अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस मनाया गया। डॉ अखिलेश शुक्ल अपने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज सेवा, भारतीय संस्कृति का प्राण तत्व है, भारतीय संस्कृति और समाज में यह अपने आप में निहित है, इसलिए किसी भी विकट परिस्थिति में स्वयंसेवक स्वतः स्फूर्त हो कर समाज की सेवा में जुट जाते हैं।

    पूरे विश्व में 5 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस मनाया जाता है। यह दिवस स्वयंसेवकों और स्वयंसेवी संगठनों के लिए उनकी उपलब्धियों को याद करने, उनके काम को बढ़ावा देने, सरकारी सहायता को प्रोत्साहित करने और दूसरों को उनके प्रयासों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का अवसर प्रदान करता है। अपने देश या समाज के लिए अपनी इच्छा से अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार नागरिकों के छोटे समूह में सबसे संभव परिवर्तन लाने की शक्ति होती है। यह दिवस दूसरों को स्वेच्छा से समाज सेवा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक तरंग प्रभाव पैदा करता है। हम इन्हीं कारणों से अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस मनाते हैं और स्वयंसेवी संगठनों और कार्यकर्ताओं को पूरे वर्ष उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए धन्यवाद देते हैं।

    सन 1985 में संयुक्त राष्ट्र ने 5 दिसंबर को स्वयंसेवी संगठनों और कार्यकर्ताओं की मेहनत लगन और कार्य को याद करने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लिया था। स्वयंसेवा का कार्य दुनिया भर में और हर संस्कृति में देखा जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस विभिन्न संगठनों को समुदाय में उनके योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है। कई गैर-लाभकारी संस्थाएं और संगठन अपने उद्देश्य का समर्थन करने के लिए स्वयंसेवी प्रयासों पर भरोसा करते हैं।

    इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

    प्राची मिश्रा, अजंली कुशवाहा, श्रद्धा तिवारी, सुरभी शर्मा, सुरभी गुप्ता तथा सहिबा खान ने अपने विचारों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. गुजंन सिंह, डॉ शिव बिहारी कुशवाहा, डॉ प्रियंका तिवारी एवं डॉ. मन्जू श्री मिश्रा का उल्लेखनीय योगदान रहा।

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