किशोरी को पढ़ाएंगे, खिलाएंगे, तभी मजबूत समाज पाएंगे। कुपोषित बच्चों को मिला नया जीवनदान
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rewa today :किशोरी को पढ़ाएंगे, खिलाएंगे, तभी मजबूत समाज पाएंगे। कुपोषित बच्चों को मिला नया जीवनदान

Only if we educate and feed the girls, we will have a strong society. Malnourished children get new lease of life

Rewa Today Desk :कम उम्र में विवाह के घातक परिणाम होते हैं। ऐसा सुनने में सदैव आता रहा है। ऐसा ही कुछ वाक्या अभी हाल में देखने को मिला। जिला मऊगंज अंतर्गत ब्लॉक नाईगढ़ी के ग्राम बंधवा निवासी काजल कुशवाहा पति मोहित कुशवाहा जो अपने एक माह की बच्ची काव्या को लेकर इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नईगढ़ी पहुंची।जहां बी एम ओ डॉ आर के पाठक ने बच्ची की हालत नाजुक देखकर उसे जिला अस्पताल रीवा में भर्ती करने की सलाह दी। मगर जैसे ही काजल कुशवाह ने सुना की बच्ची को रीवा जाने के लिए कहा जा रहा है वह रोने लगी और रीवा ले जाने से इनकार करने लगी तभी चिकित्सको ने उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करने की सलाह दी। जहां बच्ची का बजन 1 किलो 355 ग्राम था, बच्ची सुस्त थी। तों वही मां का दूध नहीं पी रही थी, जिससे बच्ची कमजोर होती जा रही है।

पोषण पुनर्वास केंद्र की टीम ने बच्ची की केयर की। बच्ची सक्रिय दिखने लगी तो मां का मनोबल बढ़ाने लगा। मां को भी खून की कमी भी थी। तथा काउंसलिंग के दौरान पता चला कि काजल कम उम्र में ही मां बन गई और काव्या का जन्म भी 7 माह में ही हो गया। पुनर्वास केंद्र से जब काव्या की छुट्टी हुई तो उसका वजन 1 किलो 570 ग्राम था। तथा अब वह पूर्णतः स्वस्थ है। इसी तरह पूर्वी यादव 2 माह ग्राम गडरा जिसका वजन 2 किलो 100 ग्राम एवं कृतिका कुशवाहा ग्राम कैछुआ 2 माह जिसका वजन 1किलो 460 ग्राम में भर्ती कराया गया था। जो की हीन भावना से ग्रस्त हो कर गाय का दूध पिलाने लगे थे।जिससे बच्चों में दस्त और अन्य समस्याएं बढ़ रही थी जिन्हें पुनः स्तनपान पर लाया गया।जिसका वजन छुट्टी के समय 1किलो 740 ग्राम हो गया। अब तीनो बच्चे पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हैं।


पोषण पुनर्वास केंद्र में पदस्थ पोशाक प्रदर्शन आशीष खरे से मिली जानकारी के अनुसार तीनों बच्चे बहुत ही नाजुक अवस्था में केंद्र में आए थे। जिनकी माताएं सभी 17 एवं 18 वर्ष की थी। माताएं कमजोर एवं खून की कमी से ग्रस्त थी। जिन्हें लगातार अच्छी समझाइए एवं पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग करने की सलाह तो दी ही गई साथ में पुनर्वास केंद्र के अपने किचन गार्डन में उपलब्ध मुनगा की पत्ती शतावरी आदि का इस्तेमाल प्रतिदिन कराने से उसका सकारात्मक प्रभाव उनके स्वास्थ्य में दिखा जो कि केंद्र में भर्ती सभी माता के लिए प्रेरणादायक है.
नईगढी से नसीम खान की रिपोर्ट

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