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स्वतंत्रता दिवस के दिन पानी में डूबने से दो बच्चों की हुई मौत

Two children drowned to death on Independence Day.

आजादी के जश्न में मातम पतसरा


पूरा देश 80 व स्वतंत्रता दिवस समारोह मना रहा था, रीवा जिले के गढ़ में भी जश्न मनाया जा रहा था ।इसी दौरान आजादी के जश्न में मातम की खबर आ गई, गढ़ में स्कूल के पास, मौत की खदान ने निगल लिए दो मासूम, दो मासूम बच्चों की जिनकी उम्र लगभग 13 14 साल के बीच थी पानी में डूबने से मौत हो गई।स्वतंत्रता दिवस का दिन, बच्चों ने स्कूल में तिरंगा फहराया दोस्तों के साथ राष्ट्रगीत राष्ट्रगान गया।

उसके बाद वहीं पास में खेल के मैदान के पास पहुंच गए जहां एक गड्ढे में पानी भरा था, न जाने कैसे पानी में गिर गए जिसके चलते दोनों बच्चों की मौत हो गई। हालांकि स्थानीय लोग और बच्चों ने दोनों को बचाने का प्रयास किया लेकिन जब तक उनको पानी से निकाला जाता काफी देर हो गई थी।

डॉक्टर ने उनको देखते ही मृत घोषित कर दिया। जहां चंद मिनट पहले खुशियों का माहौल था, वहां एका एक मातम पसर गया। जी हां आज स्कूलों में तिरंगा लहरा रहा था, बच्चे देशभक्ति के गीत गा रहे थे ,और हर तरफ उत्साह का माहौल था।

लेकिन इसी बीच रीवा जिले के गढ़ थाना क्षेत्र में एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। स्कूल के खेल मैदान के समीप पानी से लबालब भरी गहरी खदान में डूबने से दो मासूम छात्रों की जान चली गई। बड़ा सवाल यही है, स्कूल के खेल के मैदान के पास गड्ढा किसने किया, वहां पानी कैसे भरा
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, सुरक्षा व्यवस्था और अवैध मिट्टी उत्खनन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर विद्यालय और खेल मैदान के समीप इतनी गहरी खदान कैसे बनी? उसमें पानी भरने के बाद भी उसे सुरक्षित क्यों नहीं कराया गया? क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने कभी इस खतरनाक स्थान की सुध ली।

स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के बाद मौत के मुंह में पहुंचे बच्चे

जानकारी के अनुसार सुभाष सोनी पिता रजनीश सोनी, उम्र करीब 13 वर्ष, निवासी खर्रा, थाना नईगढ़ी, जिला मऊगंज तथा शिव पाठक पिता पूर्णेंद्र पाठक, निवासी तेडताल, थाना नईगढ़ी, जिला मऊगंज स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल होने गढ़ आए थे।


सुभाष गढ़ के बाल भारती स्कूल में पढ़ता था, जबकि शिव पाठक पतंजलि पब्लिक स्कूल गढ़ का छात्र था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोनों बच्चे शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गढ़ के खेल मैदान के समीप पहुंचे। इसी दौरान मैदान के बगल में बनी गहरी खदान में भरे पानी में दोनों डूब गए।कुछ ही देर में चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों को घटना की जानकारी मिली तो बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। गढ़ पुलिस को सूचना दी गई और बच्चों को बचाने के लिए तलाश अभियान शुरू किया गया।

कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकले बच्चे, रीवा में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया। गंभीर हालत में दोनों को तत्काल उपचार के लिए भेजा गया। बाद में दोनों को रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय रेफर किया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।


दो मासूमों की मौत की खबर जैसे ही उनके गांव और परिजनों तक पहुंची, वहां कोहराम मच गया। जिस दिन परिवार अपने बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मनाने की उम्मीद कर रहा था, उसी दिन घरों में मातम छा गया।

खदान नहीं, मौत का खुला कुआं था—फिर सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं

इस हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल खदान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि यह गहरी खदान मिट्टी उत्खनन के कारण बनी और बारिश के बाद इसमें पानी भर गया।अगर यह विद्यालय के खेल मैदान के इतने करीब था तो बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभागों ने इसे पहले क्यों नहीं देखा
अगर यहां मिट्टी का उत्खनन हुआ था तो उत्खनन की अनुमति किसने दी, कितनी जमीन पर उत्खनन हुआ और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच कौन करेगा

खनिज विभाग की भूमिका पर उठे सवाल


कौन बताएगा विद्यालय और सार्वजनिक खेल मैदान के समीप ऐसी खतरनाक खदान किसकी अनुमति से बनी। जिस दौरान मिट्टी निकाली गई, किसकी अनुमति से निकली गई कौन है इसका जिम्मेदारजिम्मेदार विभाग ने क्या निरीक्षण किया? सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

दो बच्चों की मौत के बाद अगर भी जिम्मेदारों की नींद नहीं खुलती, तो फिर कब खुलेगी। बारिश का मौसम चल रहा है, चारों तरफ गड्ढे या जलभराव वाले असुरक्षित स्थान मौजूद हैं, क्या किसी की नजर इन पर पड़ेगी, अगर पड़ेगी तो इसकी व्यवस्था कौन करवाएगा। खासतौर से बात की जाए तो,विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, खेल मैदानों और आबादी के आसपास मौजूद खतरनाक गड्ढों और खदानों को सुरक्षित कराने के लिए क्या कोई अभियान चलाएगा यह भी एक बड़ा सवाल है।

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