लड़कियों की फोटो और फर्जी नंबर से लोगों को बनाया जा रहा शिकार
रिपोर्ट: विशेष संवाददाता
Rewa Today Desk फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) — जिले में साइबर अपराध का एक नया और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां ठगों का एक गिरोह सोशल मीडिया पर लड़कियों की फोटो और फर्जी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसा रहा है। यह तरीका इतना चालाकी भरा है कि आम लोग आसानी से धोखे का शिकार हो रहे हैं।
कैसे दिया जा रहा वारदात को अंजाम?
जांच में सामने आया है कि अपराधी सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से किसी लड़की की तस्वीर डाउनलोड करते हैं। इसके बाद उसी फोटो के साथ:
- फर्जी नाम से नया अकाउंट बनाया जाता है
- एक मोबाइल नंबर जोड़कर उसे असली दिखाने की कोशिश की जाती है
- लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट या मैसेज भेजे जाते हैं
धीरे-धीरे बातचीत शुरू कर दोस्ती या रिश्ते का भरोसा बनाया जाता है, और फिर ठगी का खेल शुरू होता है।
ब्लैकमेलिंग भी शामिल
कई मामलों में यह भी सामने आया है कि:
- लोगों को वीडियो कॉल या निजी चैट के लिए उकसाया जाता है
- बाद में स्क्रीन रिकॉर्डिंग या फोटो का डर दिखाकर पैसे मांगे जाते हैं
- पैसे न देने पर सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दी जाती है
इस तरह के मामलों में पीड़ित न सिर्फ आर्थिक नुकसान झेलते हैं, बल्कि मानसिक तनाव का भी सामना करते हैं।
क्यों तेजी से बढ़ रहा है यह अपराध?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:
- सोशल मीडिया पर लोगों का बढ़ता भरोसा
- अनजान लोगों से जल्दी जुड़ने की आदत
- डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी
यही वजह है कि ठग इस तरीके का इस्तेमाल कर आसानी से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई
फतेहपुर पुलिस और साइबर सेल इस मामले को गंभीरता से लेते हुए:
- संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है
- फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स को ट्रैक किया जा रहा है
- आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की कोशिश जारी है
साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।
खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
ऐसे साइबर फ्रॉड से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां:
- अनजान प्रोफाइल या नंबर पर भरोसा न करें
- निजी फोटो, वीडियो या जानकारी साझा न करें
- किसी भी तरह के पैसे ट्रांसफर करने से पहले सत्यापन जरूर करें
- ब्लैकमेलिंग की स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें
फतेहपुर में सामने आया यह मामला साफ दिखाता है कि साइबर अपराधी अब नई तकनीकों और मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
लोगों को चाहिए कि वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, ताकि इस तरह की ठगी से खुद को सुरक्षित रख सकें।



















































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