कुलगाम में आतंकियों से लोहा लेने वाले रीवा के वीर जवान पीयूष सिंह गहरवार की बहादुरी की कहानी
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कुलगाम में आतंकियों से लोहा लेने वाले रीवा के वीर जवान पीयूष सिंह गहरवार की बहादुरी की कहानी

The Story of the Bravery of Piyush Singh Gaharwar—The Gallant Soldier from Rewa Who Fought Against Terrorists in Kulgam.

रीवा/जम्मू-कश्मीर:
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के जांबाज सैनिक पीयूष सिंह गहरवार ने जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया। इस मुठभेड़ में वह खुद गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके शरीर में दो गोलियां लगीं। कई महीनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ होकर एक बार फिर सरहद की सुरक्षा के लिए तैयार हैं।

2 अगस्त 2025 को कुलगाम में चला बड़ा सर्च ऑपरेशन

घटना 2 अगस्त 2025 की है। सेना को सूचना मिली थी कि जम्मू-कश्मीर के कुलगाम इलाके में कुछ पाकिस्तानी आतंकवादी घुसपैठ कर छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही सेना ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात जवान पीयूष सिंह गहरवार अपनी टीम के साथ अखल जंगल क्षेत्र में आगे बढ़ रहे थे।

इसी दौरान आतंकवादियों ने जवानों को देखते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पीयूष सिंह ने पहले ही फायर में एक आतंकी को ढेर कर दिया। मुठभेड़ के दौरान उन्हें दो गोलियां लगीं, लेकिन घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरा आतंकी भी मार गिराया। इसके बाद वह बेहोश होकर गिर पड़े।

महीनों तक अस्पताल में चला इलाज

मुठभेड़ के तुरंत बाद साथियों ने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। कई दिनों तक वह बेहोशी की हालत में रहे और लंबे समय तक उनका उपचार चलता रहा। आखिरकार अपनी इच्छाशक्ति और हौसले के दम पर उन्होंने मौत को मात दी और अब फिर से देश सेवा के लिए तैयार हैं।

बचपन से था सेना में जाने का सपना

रीवा के रहने वाले पीयूष सिंह गहरवार बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहते थे। उन्होंने पूर्व सैनिक रमेश तिवारी से प्रशिक्षण लिया और कड़ी मेहनत के दम पर पहले ही प्रयास में भारतीय सेना में चयनित हो गए। बाद में उनकी पोस्टिंग राष्ट्रीय राइफल्स में हुई, जहां उन्हें जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने पीयूष

हाल ही में जब पीयूष अपने गृह ग्राम रीवा पहुंचे, तो उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ चलने वाले ऑपरेशन और सीमा सुरक्षा को लेकर अपने अनुभव साझा किए। उनकी बहादुरी और देशभक्ति की कहानी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सेना में जाकर देश सेवा का सपना देखते हैं।

देश की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकवादियों से मुकाबला करने वाले वीर जवान पीयूष सिंह गहरवार ने न केवल अपने परिवार और रीवा जिले, बल्कि पूरे प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है।

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