Rewa Today Desk : मध्य प्रदेश के प्रमुख और बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार रीवा का संजय गांधी अस्पताल इन दिनों गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। भीषण गर्मी के बीच अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल पांच मंजिला है, लेकिन पीने के पानी की व्यवस्था केवल ग्राउंड फ्लोर तक ही सीमित है। पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों के परिजन बार-बार नीचे जाकर पानी लाने को मजबूर हैं। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि मरीजों की देखभाल भी प्रभावित हो रही है।
जानकारी के अनुसार, संजय गांधी अस्पताल में प्रतिदिन 2500 से 3000 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, जबकि अस्पताल में लगभग 1400 बिस्तरों की सुविधा है। कुल मिलाकर रोजाना करीब 5000 से अधिक लोगों का आवागमन यहां होता है। इसके बावजूद अस्पताल में केवल दो वाटर कूलर लगाए गए हैं, जिनमें से एक हाल ही में स्थापित किया गया है।
भीषण गर्मी के चलते तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे में ठंडे पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था न होना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। सबसे अधिक परेशानी उन परिजनों को हो रही है जो मरीज के साथ अकेले आते हैं। उन्हें मरीज की देखभाल और पानी लाने के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई हो रही है।
कई मामलों में परिजन अपने मरीज को दूसरों के भरोसे छोड़कर पानी लेने जाते हैं, जबकि कुछ लोग मजबूरी में छोटे बच्चों को पानी लाने के लिए भेज रहे हैं। यह स्थिति अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रत्येक मंजिल पर पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।
हमारी टीम ने अस्पताल पहुंचकर इस समस्या का जायजा लिया। तस्वीरें और हालात यह साफ बताते हैं कि इस भीषण गर्मी में पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए भी लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है।


















































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